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(नोट – इस वाकये का उस व?यक?ति से कोई संबंध नहीं है जो चौक की वेब-साइट पर काका नाम इस?तेमाल करता है।)
काफी़ दिनों पहले की बात है। काका हाथरसी धर?मय?ग (साप?ताहिक) में अपनी कवितायें छपवाया करते थे। हर सप?ताह ?क कविता छपती थी, जिसमें छ?ह लाइनें होती थीं। आम तौर पर कविता किसी कंटेम?पोररी मामले पर होती थी। इसी दौरान 1968 में अमेरिका की भूतपूर?व फर?स?ट लेडी – श?रीमती जैकी केन?नेडी नें – ग?रीक कड़ोड़पति श?री अरिस?टोट?ल ओनासिस से शादी कर ली। जैकी की उम?र थी 39, और ओनासिस थे़ 62 साल के – ये उम?र फर?क हर जगह चर?चा का विषय बना था। काका हाथरसी को खूब मौका मिल गया, और उन?हों ने इस विषय पर ?क कविता लिखी जिसका नाम था “काकी से फरियाद?।
“काकी से हमने करी – हाथ़ जोड़ फरियाद
यौवन आता है प?रिये – साठ साल के बाद
साठ साल के बाद – कहें क?या त?मसे रानी
इस विवाह को देख – भर गया म??ह में पानी
बासठ के ओनासिस – बासठ के ही काका
आज?ञा हो तो हम भी करलें – धूम धड़ाका?
?से तो लोग ह?सी मजाक के वाकयों को ?कबार पढ़कर और ह?स कर फिर “नेक?स?ट? की ओर बढ़ जाते हैं, लेकिन इस मौके पर ?सा नहीं ह?आ क?योंकि काका के ?क प?रतिद?वन?दी कवि थे जिनका (लेखकिये) नाम था – चीमटाराम। उन?हे भी मौका मिल गया और दो सप?ताहों में उन?होंने “काकी का जवाब? प?रस?त?त कर दिया।
“शरम करो, सठिया गये – ओनासिस की द?म
धूम धड़ाका करोगे – क?या खाकर के त?म
क?या खाकर के त?म – बनोगे बूढ़े दूल?हा
म??ह का पानी थ़ूक, चलो घर – फू?को चूल?हा
खबरदार जो म??़े छ़ोड़कर – इत-उत ताका
लू?गी दाढ़ी नोच – याद रखना यह काका?
काका तो काका ही थे। इसके पहले कि हंसियों की फ?ल?़ड़िया? र?क पातीं, उन?होने दो सप?ताह में अपना “फटकार स?वीकार? भी मौजूद कर दिया।
“काकी से हमने कहा – बतला दो सरकार
क?यू? पर?दे की ओट से – भिजवाई फटकार
भिजवाई फटकार – अगर कह देती हमसे
क?षमा-याचना डाइरेक?ट – कर लेते त?मसे
इसी बहाने जान गये – सब लोग-ल?गइया
चत?र चीमटा-राम त?म?हारे – लगते भइया ?
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Post by Cobra on Jul 26, 2008 12:02:28 pm
Einstein,
http://quillpad.in/hindi/
ना मेरे पास कोई कीबोर?ड ना कोई सॉफ?टवियर बस यहा? टाइप किया और कॉपी करके चौकपे छप दिया!
Post by einsteinwallah on Jul 26, 2008 8:49:52 am
Thanks BJ for info. I donot want to install devnagari keyboard yet. So I was wondering if there is an easier way. Baraha software is good. I will stick with it.
Post by Eklavya on Jul 26, 2008 8:41:23 am
यौवन आता है प?रिये – साठ साल के बाद
isee baat pe, pesh hai...
inn chowkan ki raahan par, saare phenke jaal
koi kavi, koi kassai, koi khenche khaal
koi kheenche khal, sunaaye aisee gaali
kaan garam jo jaayen bhaiyya, gaalon pe ho laali
in submaa beej hain, humaare pyaare bhaiyyaa
ghoomat, naachat, chahakat, jaise krishna kanhaiyya.
Post by BJ2 on Jul 26, 2008 8:29:37 am
And do take note of the following...
यौवन आता है प?रिये – साठ साल के बाद
Post by BJ2 on Jul 26, 2008 8:26:12 am
Eklavya, have you realized that deep inside you there is a hasya-kavi yearning to come out - just waiting for the right spark!
Post by BJ2 on Jul 26, 2008 8:22:20 am
कोई सौफ?टवेयर नहीं। केवल मैं हू?, कीबोर?ड है, और मेरी अंग?लिया?।
Post by Eklavya on Jul 26, 2008 8:19:45 am
Beej, here is a summary
kaka tau tharaki huye, sun jakckie ka naam
kaki se binti karein, sunte cheenta ram
sunte cheenta ram, kahain sun bey kaka
buddha khoosat hai tu, na koi baanka
kaka tau kaka rahe, kiwiyon ki jaat
cheenta ko saala kaha, sau baton ki baat.
Post by einsteinwallah on Jul 26, 2008 7:34:31 am
अच?छी कहानी है. क?या त?म Baraha या वैसा ही कोइ software use करते हो, ना की Indian keyboard से देवनागरी type करते हो?
www.chowk.com/unplugged/t/55836
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